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क्या आजमगढ़ में योगी की रैली के बाद भी निरहुआ को फिर से मिलेगी करारी हार।

हाल ही में विधानसभा चुनाव समाप्त हुए ही थे जिसके बाद कई प्रत्याशियों ने लोकसभा छोड़ विधानसभा की तरफ रुख किया था इसमें एक बड़ा नाम अखिलेश यादव का और दूसरा नाम आजम खान का है अखिलेश यादव ने आजमगढ़ से सांसद ही पद से इस्तीफा देकर मैनपुरी की करहल विधानसभा सीट से चुनाव जीत विधानसभा का रुख किया वही आजम खान ने रामपुर से सांसद पद से इस्तीफा देकर विधानसभा का रुख किया ऐसे में 2 लोकसभा सीटों पर 23 जून को उपचुनाव होने वाला है और भाजपा व सपा ने चुनावी मैदान में एक दूसरे को टारगेट करना शुरू भी कर दिया। हाल ही में जेल से बाहर आए आजम खान को लेकर ऐसा कहा जा रहा था कि वो सपा का दामन छोड़ सकते हैं लेकिन सपा के विरोधियों के लिए ये सपना ही रह गया। अखिलेश यादव ने आजम खान के वकील रहे दिग्गज नेता कपिल सिब्बल को राज्यसभा भेज साथ ही आजम के करीबी को रामपुर से लोकसभा का टिकट देकर एक बार फिर से साबित कर दिया कि समाजवादी पार्टी में आजम खान का क्या महत्व है।

अखिलेश यादव ने आजमगढ़ सीट छोड़ बीजेपी के निरहुआ को सांसद बनने का मौका दिया ही था कि सपा के आजमगढ़ के नेताओं ने अखिलेश यादव के परिवार से ही सदस्य को चुनाव लड़ाने की मांग कर दी।
अखिलेश यादव भी किसी हाल में अपने पारिवारिक सीट को छोड़ना नहीं चाहते है क्योंकि आजमगढ़ से मुलायम सिंह यादव सांसद रहे जिसके बाद वहां की बागड़ोर अखिलेश यादव ने अपने हाथों में थाम ली, अब अखिलेश यादव ने अपने चचेरे भाई धर्मेंद्र यादव को आजमगढ़ से प्रत्याशी बना कर बीजेपी के लिए मुसीबत खड़ी कर दी। बीजेपी के पास आजमगढ़ से ऐसा कोई भी दमदार उम्मीदवार नहीं दिखाई दिया जो सपा के अभेद किला को ढहा सके जिसके बाद बीजेपी ने एक बार फिर से भोजपुरी अभिनेता दिनेश लाल यादव निरहुआ को धर्मेंद्र यादव के खिलाफ चुनावी मैदान में उतार कर आजमगढ़ के चुनाव को चर्चा का विषय बना दिया।
आजमगढ़ के लोग भी अच्छे से जानते हैं कि आजमगढ़ से समाजवादी पार्टी को हराना बीजेपी के लिए बहुत ही मुश्किल है यही वजह है कि कोई भी ये कहता नही दिख रहा कि आजमगढ़ से निरहुआ चुनाव जीतकर लोकसभा में पहुंचेंगे।