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अखिलेश यादव की असली परीक्षा केजरीवाल से होने वाली है, ना सिर्फ योगी बल्कि केजरीवाल से भी लड़ना पड़ेगा!

यूपी में अखिलेश यादव के लिए बड़ी चुनौती बनेंगे केजरीवाल क्योंकि जिस तरीके से केजरीवाल का ग्राफ पूरे देश में बढ़ता जा रहा है आने वाले समय में यूपी की सियासत में भी केजरीवाल का दबदबा बढ़ता दिखेगा जिसके बाद अखिलेश यादव की मुसीबतें बढ़ सकती है क्योंकि अखिलेश यादव विपक्ष में है ऐसे में विपक्षी की भूमिका में अगर केजरीवाल की आम आदमी पार्टी आ जाती है तो अखिलेश यादव के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।


केजरीवाल, योगी - अखिलेश को सीधी टक्कर दे पाएंगे?

जिस तरीके से पूरे देश में केजरीवाल अपनी पार्टी का विस्तार कर रहे हैं उससे साफ दिखता है कि उनका सबसे बड़ा दांव उत्तर प्रदेश ही होने वाला है 2027 के चुनाव में केजरीवाल उत्तर प्रदेश में पूरे दमखम से उतरने वाले हैं जिस तरीके से पंजाब में सरकार बनने के बाद आम आदमी पार्टी का असर दिखाई दे रही है वह अब गुजरात और हिमाचल प्रदेश पर भी असर डाल सकता है।

यूपी के बाहर सपा का कमजोर होना सपा की बड़ी कमजोरी

वहीं कई राजनीतिक विश्लेषकों का यह मानना है कि अखिलेश यादव जब तक उत्तर प्रदेश के बाहर की राजनीति में अपनी पार्टी का विस्तार नहीं करते हैं तब तक उनके लिए यूपी में तमाम पार्टियां चैलेंज बनी रहेगी क्योंकि समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश के बाहर अपना जनाधार नहीं बना पाई है मुलायम सिंह यादव के समय में समाजवादी पार्टी का कई राज्यों में विस्तार था जिसमें मध्य प्रदेश महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल भी शामिल था साथ ही राजस्थान के भी कई हिस्सों में समाजवादी पार्टी बेहतर कर पाई थी।


यूपी से बाहर सपा की लोकप्रियता कम होना बड़ी वजह -


आज की स्थिति में समाजवादी पार्टी का यूपी से बाहर अपना संगठन तैयार ना करना समाजवादी पार्टी के लिए बड़ी चुनौती है क्योंकि किसी भी पार्टी की बढ़ती लोकप्रियता को लोग अपना आधार मान लेते हैं ऐसे में अगर केजरीवाल की आम आदमी पार्टी का गुजरात और हिमाचल प्रदेश में भी विस्तार होता है तो जाहिर सी बात है कि केजरीवाल पूरे दमखम से उत्तर प्रदेश में उतरेंगे ऐसे में समाजवादी पार्टी के लिए मुसीबत यह है कि वह विपक्ष में है और वह विपक्ष की कितनी अच्छी भूमिका निभाएंगे इस पर भी यह बात निर्भर करेंगे कि केजरीवाल का फैक्टर उत्तर प्रदेश में कितना कारगर साबित होगा।


ना सिर्फ योगी बल्कि केजरीवाल से भी लड़ेंगे अखिलेश -


यूपी में योगी आदित्यनाथ ने खुद को फिर से मुख्यमंत्री के रूप में स्थापित कर लिया है और लगातार दूसरी बार समाजवादी पार्टी विपक्ष में है किसी भी पार्टी का 3 कार्यकाल सत्ता से दूर रहना उस पार्टी के न सिर्फ संगठन को कमजोर करता है बल्कि जनता का उस पार्टी के प्रति रुझान भी कम हो जाता है अब अखिलेश यादव को न सिर्फ भाजपा से लड़ना है बल्कि आम आदमी पार्टी से भी उत्तर प्रदेश में मजबूती के साथ लड़ना होगा।


राजनीति में उपेक्षित की पहली पसंद आम आदमी पार्टी -


केजरीवाल पूरे देश में ऐसा माहौल खड़ा कर दिया है कि कोई भी नौसिखिया या राजनीति में खुद को असहज महसूस करने वाला आम आदमी पार्टी की तरफ झुक रहा है कांग्रेस का खराब प्रदर्शन न सिर्फ बीजेपी को फायदा दे रहा है बल्कि आम आदमी पार्टी को इसका सीधा फायदा होता दिख रहा है। 


जिस तरीके से आम आदमी पार्टी गुजरात चुनाव में दमखम से उतरने के मूड में दिख रही है उससे साफ लग रहा है कि केजरीवाल पूरे देश में अपनी पार्टी का विस्तार कर केंद्र की राजनीति की तरफ रुख करना चाहते हैं और ऐसे में उत्तर प्रदेश हर उस पार्टी के लिए अहम हो जाता है जो केंद्र की सत्ता पर काबिज होना चाहता है।

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