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Anna Hazare Biography in Hindi || अन्ना हजारे का जीवन परिचय

अन्ना हजारे का जीवन परिचय-




अन्ना हजारे(Anna Hazare) का जन्म 15 जून 1937 को रालेगन सिद्धि, अहमदनगर, महाराष्ट्र में हुआ था, इनका पूरा नाम किसन बाबूराव हजारे है। अन्ना हजारे(Anna Hazare) एक भारतीय समाजसेवी है। 16 अगस्त 2011 को जन लोकपाल विधेयक के लिए अन्ना हजारे(Anna Hazare) आमरण अनशन पर बैठ गए जिसके लिए उन्हें पूरे देश भर से समर्थन प्राप्त हुआ और हर किसी की जुबान पर एक ही नारा था मैं गाँधी हूँ, मैं अन्ना हूँ। अन्ना हजारे(Anna Hazare) के पिता का नाम बाबूराव हजारे और माँ का नाम लक्ष्मीबाई हजारे था। अन्ना जी से एक टीवी शो में पूछा गया कि आपका नाम किसन बाबूराव हजारे से अन्ना कैसे पड़ा तो उन्होंने बताया कि उनके महाराष्ट्र में बड़े भाई को अन्ना कहते है, पहले मुझे घर के लोग अन्ना कहते थे फिर पड़ोस के और अब पूरा देश अन्ना कहता है।
अन्ना हजारे(Anna Hazare) के बारे में सम्पूर्ण जानकारी-

अन्ना हजारे(Anna Hazare) अविवाहित है। अन्ना जी का बचपन बहुत गरीबी में गुजरा, उनके पिता मजदूर थे और उनके दादा सेना में थे। अन्ना के छह भाई-बहन है, जिसमे 4 भाई और 2 बहन है। परिवार की आर्थिक तंगी को देखकर उनकी बुआ उन्हें मुंबई ले गयी। परिवार की स्थिति देख अन्ना दादर स्टेशन के बाहर एक फूल बेंचनेवाले की दुकान पर काम करने लगे जिसके लिए उन्हें 40 रूपए मिलते थे। फूलो की दुकान पर काम करते करते उन्होंने खुद एक फूलो की दुकान खोल ली और अपने दो भाइयो को भी अपने गाँव से मुंबई बुला लिया। अन्ना अपने छह भाई-बहनों में सबसे बड़े है। अन्ना की पढाई मुंबई में हुयी, आर्थिक तंगी के कारण वो सिर्फ 7वीं तक ही पढ़ सके।

1962 में भारत-चीन का युद्ध हो रहा था जिसके चलते सरकार ने देश के युवाओ से अपील की कि वो सेना में शामिल हो, जिसके चलते अन्ना ने 1963 में सेना की मराठा रेजिमेंट में ड्राइवर के रूप में भर्ती हो गए। अन्ना की लम्बाई ज्यादा नहीं थी लेकिन सेना को युवाओ की जरुरत थी और अन्ना ने अपने आप को आर्मी में जाने के लिए राजी कर लिया और वो भर्ती हो गए।

भारत सरकार ने 1992 में अन्ना हजारे को पद्मविभूषण से सम्मानित किया था। अन्ना हजारे 1975 से रालेगण सिद्धि के संत यादवबाबा मंदिर के एक छोटे से कमरे में रहते है।

1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान अन्ना खेमकरण सेक्टर में तैनात थे, अन्ना बताते है भारत-पाक युद्ध के दौरान गाड़ी चलाते वक्त वो एक दुर्घटना का शिकार हो गए जिसमे वो बाल-बाल बच गए थे, जिसे वो भगवान के चमत्कार के रूप में मानते है और कहते है कि भगवान ने उन्हें जन सेवा और सामाजिक कार्य करने का एक संकेत दिया था।

अन्ना के प्रयास से उनके गाँव रालेगण सिद्धि में युवा समूह के संगठन ने तम्बाकू, सिगरेट, बीडी, शराब की बिक्री पर रोक लगा दी अब रालेगण सिद्धि में किसी भी तरह का नशायुक्त पदार्थ नहीं बेंचा जाता। अपने गाँव में अन्ना जी ने 1980 में सूखा या फसल बर्बाद होने की स्थिति के लिए किसानो के लिए मंदिर में अनाज बैंक की शुरुआत की जो कि किसानो को खाद्य सुरक्षा प्रदान करती थी, और जिससे अनाज के संकट से निपटा जा सकता था। सिंचाई में सुधार हेतु अन्ना ने वाटरशेड विकास कार्यक्रम की शुरुआत की, जिससे पानी की समस्या समाप्त हो गयी।

लडकियों की शिक्षा के लिए अन्ना ने 1979 में एक प्री-स्कूल और हाई स्कूल की शुरुआत की ताकि लडकियों को गाँव में ही शिक्षा मिल सके। छुआछूत (अस्पर्श्यता) को दूर करने के लिए अन्ना से लोग प्रेरित हुए और गाँव के उच्च जाति के ग्रामीणों ने दलित जाति के लोगो को घर बनवाने में मदद की।

साल 2011 में अन्ना जी ने भ्रष्टाचार विरोधी जन लोकपाल विधेयक में भाग लिया जिसमे उनका साथ, सर्वोच्च न्यायलय के पूर्व न्यायमूर्ति एन संतोष हेगड़े, प्रशान्त भूषण, सामाजिक कार्यकर्ता अरविन्द केजरीवाल ने दिया। 5 अप्रैल 2011 को अन्ना ने सरकार से लोकपाल बिल जारी करने की मांग के साथ दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चित भूख हड़ताल को शुरू कर दिया, उस समय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह थे जिन्होंने अन्ना की मांग को ख़ारिज कर दिया था। उसके बाद अन्ना का आंदोलन बहुत बड़ा हो गया कई नेताओ और लोकप्रिय हस्तियों ने अन्ना का समर्थन किया और अन्ना को देश भर में भरी जनसमर्थन प्राप्त हुआ जिसके चलते 8 अप्रैल 2011 को सरकार ने अन्ना के आंदोलन की मांग स्वीकार कर ली, और सरकार ने 16 अगस्त तक लोकपाल लाने की बात कही| 16 अगस्त 2011 को जो लोकपाल सरकार संसद में लायी वो बहुत कमजोर और जनविरोधी था इसके चलते अन्ना ने एक बार फिर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी जिसके चलते देश भर में 12 दिनों तक लगातार बड़ी संख्या में धरने व अनशन हुए। 28 अगस्त को सरकार की तीन शर्तो पर सहमती प्रस्ताव पास करने के बाद अन्ना जी ने अपना अनशन स्थगित कर दिया। लेकिन देश में लोकपाल बिल आज भी पारित नहीं हो पाया जिसे अन्ना या देशवासी चाहते थे।

अन्ना ने भारतीय चुनाव में मांग की कि पार्टियों के निशान के अलावा उसमे एक नोटा का विकल्प भी होना चाहिए ताकि कोई भी पार्टी या नेता पसंद ना होने की द्रष्टि में मतदाता अपनी हाजिरी नोटा पर दे सके, जिसका समर्थन भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त शहाबुद्दीन याकूब कुरैशी ने चुनाव में सुधार के लिए किया।

समाजसेवी अन्ना हजारे के अनमोल विचार-



  • खजानों को चोरो से नहीं पहरेदारो से धोखा है। देश को सिर्फ दुश्मनों से नहीं, इन गद्दारों से धोखा है।

  • स्वतंत्रता के लिए लाखो लोगो ने अपने जीवन बलिदान कर दिया लेकिन कुछ स्वार्थी लोगो के कारण हमें सही स्वतंत्रता नहीं मिली।

  • कल मेरा रक्त चाप कम था, लेकिन आज यह फिर से नियंत्रण में है क्योंकि देश की ताकत मेरे पीछे है।

  • मैं चिंतित हूँ कि कुछ असंवेदनशील लोगो द्वारा शासित इस देश का क्या होगा। लेकिन हम उन्हें जनशक्ति द्वारा बदल सकते है।

  • मेरा वजन साढ़े पांच किलो कम हुआ है, कुछ ज्यादा नहीं, मैं ठीक हूँ।

  • वही लूट,वही भ्रष्टाचार, वही गुंडागर्दी अभी भी मौजूद है।

  • वो जो अपने लिए जीते है, वो मर जाते है, वो जो समाज के लिए मरते है वो जिन्दा रहते है।

  • लोकपाल के बाद, हमें किसानो के अधिकार के लिए लड़ना होगा, एक ऐसा कानून लाना होगा जो भूमि अधिग्रहण से पहले ग्राम सभाओ की अनुमति लेना सुनिश्चित करे।

  • हम सरकार के साथ बात करने को तैयार है लेकिन उनकी तरफ से कोई संवाद नहीं है। हम बात करने कहाँ जायें और हम किससे बात करे?

  • सरकार जमीन कंपनियों को दे रही जो मजदूरों को लगाती है और उनका खून चूसती है, वे मजदूरों से कहती है तुम उत्पादन सुनिश्चित करो नहीं तो तुम जॉब खो दोगे।

  • मैं नहीं कहता कि पूरा भ्रष्टाचार ख़त्म हो जायेगा, लेकिन कम से कम यह 40-50 प्रतिशत घट जायेगा... गरीब को फायदा होगा।

  • मेरी मांगे नहीं बदलेंगी, आप मेरा सर काट सकते है लेकिन मुझे सर झुकाने के लिए मजबूर नहीं कर सकते।

  • हमें कैमरे से दूर रहना चाहिए, केवल तभी हम देश के लिए कुछ कर पाएंगे... वो जो हर समय मिडिया की चकाचौंध में रहना चाहते है वो कभी देश के लिए कुछ भी नहीं कर सकते।

  • इस सरकार में एक प्रभावी लोकपाल लाने की इच्छा नहीं है।

  • सरकारी पैसा लोगो का पैसा है। लोगो के फायदे के लिए प्रभावी नीतियां बनाएं।

  • क्या यह लोकतंत्र है? सभी एक साथ पैसा बनाने आये है, मैं खुद को सौभाग्यशाली समझूंगा अगर मैं अपने समाज, अपने देशवासियों के लिए मरता हूँ।

  • देश को वास्तविक स्वतंत्रता आजादी के 64 साल बाद भी नही मिली और केवल एक बदलाव आया गोरो की जगह काले आ गए।

  • मैं इस देश के लोगो से अनुरोध करता हूँ कि इस क्रांति को जारी रखे, अगर मैं ना रहूँ तो भी लोगो को संघर्ष जारी रखना चाहिए।

  • मुझे मेरे देश पर पूरा भरोसा है, इस सरकार ने देश को लूटा है, हम अब शांति से तभी बैठेंगे जब देश से भ्रष्टाचार ख़त्म हो जायेगा।

  • मैं इस देश के युवा से कहना चाहता हूँ कि यह लड़ाई लोकपाल के साथ ख़त्म नहीं होनी चाहिए। हमें मौजूद चुनावी सुधारो में खामियों को दूर करने के लिए लड़ना है। क्योंकि चुनाव प्रणाली में दोष के कारण 150 अपराधी संसद तक पहुँच चुके है।


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